जब 20 मिनट तक फोन पर इंतजार करते रहे राज्यपाल, नीम करोली बाबा का वो किस्सा
नई दिल्ली। हाल ही में रिलीज हुई चर्चित फिल्म ‘हनुमान अंश’ के बाद आध्यात्मिक गुरु नीम करोली बाबा एक बार फिर देशभर में चर्चा का विषय बन गए हैं। बाबा लक्ष्मण दास के जीवन और आध्यात्मिक व्यक्तित्व से प्रेरित इस फिल्म को दर्शकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। फिल्म की चर्चा और बॉक्स ऑफिस पर मिली सफलता के बाद नीम करोली बाबा के जीवन से जुड़े किस्से, उनकी लीलाएं और भक्तों के अनुभव एक बार फिर आम लोगों के बीच तेजी से चर्चा में हैं।
बाबा की सादगी, सहजता और उनसे जुड़े चमत्कारों के किस्से लंबे समय से भक्तों के बीच प्रचलित रहे हैं। लेकिन उनके जीवन के कुछ प्रसंग ऐसे भी हैं, जो उनके व्यक्तित्व के उस पहलू को सामने लाते हैं, जिसमें पद और प्रतिष्ठा से अधिक महत्व इंसान का था।
ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा मध्य प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल से जुड़ा है।
राज्यपाल ने किया फोन, बाबा चले गए बाथरूम
लेखक केशव दास द्वारा संकलित भक्तों के अनुभवों की पुस्तक Barefoot in the Heart में इस घटना का उल्लेख मिलता है।
किस्सा उस समय का है, जब नीम करोली बाबा एक होटल के कमरे में ठहरे हुए थे। कमरे में मौजूद एक भक्त को सूचना मिली कि मध्य प्रदेश के राज्यपाल बाबा से फोन पर बात करना चाहते हैं।
भक्त ने यह बात बाबा को बताई। लेकिन बाबा ने न तो कोई विशेष प्रतिक्रिया दी और न ही फोन पर बात करने की जल्दबाजी दिखाई। वे बिल्कुल सहज भाव से उठे और बाथरूम में चले गए।
कुछ ही देर बाद कमरे का फोन बज उठा।
भक्त ने फोन उठाया तो दूसरी तरफ राज्यपाल थे। उन्होंने बाबा से बात करने की इच्छा जताई। भक्त ने विनम्रता से बताया कि बाबा अभी बाथरूम में गए हैं और बाहर आने पर ही उनसे बात हो सकेगी।
इसके बाद जो हुआ, वही इस पूरे प्रसंग को खास बनाता है।
20 मिनट तक फोन पर इंतजार करते रहे राज्यपाल
राज्यपाल ने फोन काटने के बजाय इंतजार करना स्वीकार किया। करीब 20 मिनट तक फोन होल्ड पर रहा, लेकिन बाबा को बाहर आने की कोई जल्दबाजी नहीं थी।
बाबा के भक्त इस प्रसंग को उनके उस स्वभाव से जोड़कर देखते हैं, जिसमें व्यक्ति का पद या प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि उसका इंसान होना महत्वपूर्ण था।
राज्यपाल हों या कोई सामान्य भक्त—बाबा की सहजता में कोई खास अंतर दिखाई नहीं देता था।
फिल्म के बाद फिर चर्चा में बाबा की जीवन-लीलाएं
‘हनुमान अंश’ के जरिए बाबा के जीवन और उनसे जुड़े आध्यात्मिक प्रसंगों को बड़े पर्दे पर देखने के बाद नई पीढ़ी के बीच भी उनके बारे में जानने की उत्सुकता बढ़ी है। फिल्म की सफलता ने नीम करोली बाबा के जीवन से जुड़े उन किस्सों को फिर लोगों की बातचीत का हिस्सा बना दिया है, जिन्हें उनके भक्त वर्षों से सुनाते और साझा करते रहे हैं।
उनकी जिंदगी से जुड़े ऐसे प्रसंगों में कभी उनके चमत्कारों की चर्चा होती है, तो कभी उनकी सादगी और सहज व्यवहार की। यही विरोधाभास उनके व्यक्तित्व को लोगों के लिए और रहस्यमयी बनाता है।