क्या है ₹1,880 करोड़ का साइबर फ्रॉड, जिसमें फंसे हैं IPS राहुल बंसल?
एक पीड़ित की ₹21 लाख की शिकायत से लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो सिंडिकेट और ₹1 करोड़ की रिश्वत के आरोपों तक—पढ़िए इस पूरे खेल की इनसाइड स्टोरी।
शुरुआत: ₹21 लाख की वो एक शिकायत कहानी की शुरुआत होती है छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से। रवि मोहन गोस्वामी नाम के एक शख्स ने थाने में शिकायत दर्ज कराई कि उसके साथ ₹21.15 लाख की ठगी हो गई है।रवि को सोशल मीडिया विज्ञापनों और फोन कॉल्स के जरिए शेयर बाजार और फॉरेक्स ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच दिया गया था।
उन्होंने Money Trade 365 और Skytrade जैसे प्लेटफॉर्म्स पर 84 अलग-अलग ट्रांजैक्शन करके पैसे लगाए। जब उन्होंने मुनाफा निकालना चाहा, तो सिस्टम ने एरर दिखा दिया और उनके पैसे अटक गए।
22 जुलाई 2025 को सरगुजा साइबर थाने में एफआईआर दर्ज हुई, और जांच की कमान संभाली वहां तैनात 2022 बैच के ट्रेनी आईपीएस अधिकारी व सीएसपी राहुल बंसल ने।
परत-दर-परत खुलासा: ₹21 लाख से ₹1,880 करोड़ का सिंडिकेट पुलिस ने जब पैसे के लेन-देन (Money Trail) का पीछा करना शुरू किया, तो सामने आई एक ऐसी परत दर परत की कहानी जिसने जांच एजेंसियों के होश उड़ा दिए:
फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और बैकडोर कंट्रोल: सिंडिकेट ने असली दिखने वाले ऐप्स बनाए थे। गिरोह का मुख्य सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट लिंबानी अवनिक मनसुखभाई उर्फ चिराग था, जिसके पास से 38 फर्जी वेबसाइट्स के सोर्स कोड मिले। इन ऐप्स का पूरा रिमोट कंट्रोल गिरोह के पास था—वे स्क्रीन पर फर्जी मुनाफा दिखाते थे, लेकिन पैसे निकालने का ऑप्शन बंद कर देते थे।
दुबई से कॉलिंग नेटवर्क: मास्टरमाइंड अंशुल गिनोत्रा और गर्वित जैन दुबई से कॉल सेंटर चलवा रहे थे। वहां ₹35,000 से ₹40,000 की सैलरी पर भारतीय युवाओं को रखकर लोगों को फंसाने के लिए फोन करवाए जाते थे।
डमी कंपनियां और बिकने वाले बैंक खाते: ठगी का पैसा सीधे मुख्य सरगनाओं के पास नहीं जाता था। एसएस एंटरप्राइजेज और गुरु एंटरप्राइजेज जैसी फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खोले गए। एक-एक करंट अकाउंट को डेढ़ लाख रुपये में दलालों से खरीदा जाता था।
फिनटेक गेटवे और कैश-टू-क्रिप्टो: ‘गो-पेमेंट’ जैसे फिनटेक पेमेंट सिस्टम में बिना केवाईसी के फर्जी आईडी बनाई गईं। केवल एक डमी आईडी से 6 अक्टूबर 2025 को एक ही दिन में ₹8.86 करोड़ का लेन-देन हुआ। इसके बाद इस पैसे को कैश में बदलकर USDT और USDC जैसी क्रिप्टोकरेंसी में तब्दील कर विदेशों में ट्रांसफर कर दिया जाता था।जांच में खुलासा हुआ कि यह सिंडिकेट 2022 से चल रहा था और महज 4 महीनों के भीतर इनके वॉलेट्स से ₹1,880 करोड़ का क्रिप्टो लेन-देन हुआ था।
पुलिस ने 8 राज्यों से 23 लोगों को गिरफ्तार किया और 5 चार्जशीट दाखिल कीं।कहानी में ट्विस्ट: जब जांच करने वाले IPS पर ही लगे ₹1 करोड़ के आरोपजैसे ही इस बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़ हुआ, कहानी में एक नाटकीय मोड़ आया। मामले की जांच कर रहे ट्रेनी आईपीएस राहुल बंसल, एएसआई प्रवीण कुमार राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा खुद कटघरे में आ गए।
* रिश्वत का आरोप: दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित स्पेशल सीबीआई कोर्ट में एक शिकायत पहुंची। इसमें आरोप लगाया गया कि इस पूरे साइबर फ्रॉड केस को रफा-दफा करने और मामले को दबाने के लिए पुलिस टीम ने ₹1 करोड़ की घूस मांगी और ली। * हवाला से लेन-देन का दावा: शिकायतकर्ता का दावा है कि मई 2026 में हवाला के जरिए 50-50 लाख रुपये की दो किस्तों में कुल 1 करोड़ रुपये पहुंचाए गए। सबूत के तौर पर कथित व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्डिंग्स भी अदालत में पेश की गईं।
कोर्ट का एक्शन:
विशेष सीबीआई अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ के डीजीपी और सीबीआई डायरेक्टर से ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (ATR) तलब कर ली है।
आईपीएस राहुल बंसल का पक्ष
अपने ऊपर लगे गंभीर आरोपों पर आईपीएस राहुल बंसल का कहना है कि यह पूरी तरह से बेबुनियाद और झूठी साजिश है। उनका कहना है कि उन्होंने देश के सबसे बड़े साइबर घोटालों में से एक का पर्दाफाश किया है, 23 आरोपियों को जेल भेजा है और हजारों पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। मामला फिलहाल कोर्ट के विचाराधीन है और उन्हें कानून व न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।> सार: ₹21 लाख की एक आम साइबर ठगी से शुरू हुई यह दास्तान ₹1,880 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो करेंसी हवाला नेटवर्क तक पहुंची, और अब यह दिल्ली की सीबीआई अदालत में ₹1 करोड़ की कथित रिश्वत के संगीन आरोपों के घेरे में आ चुकी है।